की मुझको माथा मलने की तालीम वरना क्यों — मोमिन ख़ाँ मोमिन

की मुझको माथा मलने की तालीम वरना क्यों ग़ैरों को आगे बज़्म में वह इत्र मल गया

“Was it to teach me how to wring my brow in grief—else why should he, before the gathering, rub that perfume on my rivals' skin?”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

क्या मुझे माथा मलने की सीख देने के लिए, वरना उसने महफ़िल में सबके सामने वह इत्र मेरे प्रतिद्वंद्वियों को क्यों मला।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ के दिल में हल्की सी जलन और शिकायत है। वह देखता है कि महफ़िल में उसकी महबूबा ने सबके सामने ग़ैरों के बदन पर इत्र मल दिया। तब वह आधा मज़ाक़ और आधा दर्द के साथ सोचता है कि क्या उसे सिर्फ़ अपना माथा मलते रहने की तालीम दी गई है। आख़िर क्यों महबूबा इतने खुलेआम दूसरों को नवाज़ती है और उसे सिर्फ़ बेबसी और तड़प में छोड़ देती है। यह शेर उस मीठे-कड़वे एहसास को बयान करता है, जब कोई प्यारा इंसान सबको चाहत देता है, बस आपको नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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