क़द्द-ए-बुलंद अगरचे बे-लुत्फ़ भी नहीं है — मीर तक़ी मीर
क़द्द-ए-बुलंद अगरचे बे-लुत्फ़ भी नहीं है
सर्व-ए-चमन में लेकिन अंदाज़ा वो न पाया
“Even if the lofty poem lacks grace, It could not guess the splendor of the whole garden.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर ऊँचा काव्य भले ही न शालीन हो, फिर भी वह पूरे बाग़ की शोभा का अंदाज़ा नहीं लगा सका।
विस्तार
यह शेर इंसान के अंदर के रहस्य को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि किसी का कद-ए-बुलंद होना ही काफी नहीं है... कि वो पूरी तरह से समझ लिया जाए। असली बात तो ये है कि आप इतने करीब होते हुए भी, उस शख़्स के अंदाज़े से दूर क्यों रह जाते हैं! यह ज़िंदगी की अनकही उलझनों पर एक गहरा तंज़ है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
