“Even when it's just an approximation, you still stay by my side, Ten times, 'when did Eid come, when did you embrace me?'”
तक़रीब पर भी तो तू पहलू तही करे है, दस बार 'ईद आई कब कब गले मिला तू। शायर कह रहा है कि तुम अनुमान पर भी मेरे पास ही रहती हो, और यह भी कहता है कि ईद कई बार आई, पर तुम मुझसे गले नहीं मिली।
यह शेर सिर्फ़ दूरी की बात नहीं करता, बल्कि रिश्तों की गहराई पर सवाल उठाता है। शायर कहते हैं कि आप तक़रीब में भी पास हैं, पर असली बात तो दूसरी है। दस बार 'ईद' का त्योहार आया, कितनी बार मिलन हुआ? यह एक दर्द भरा एहसास है कि महबूब का साथ तो है, लेकिन वो सच्चा, दिल से जुड़ा हुआ आलिंगन कहीं नहीं मिला।
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