जाते नहीं उठाए ये शोर हर सहर के
या अब चमन में बुलबुल हम ही रहेंगे या तू
“This noise does not leave every dawn that we wake up to, Or shall I be the nightingale in this garden, or shall it be you?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
यह शोर हर सुबह के उठने पर नहीं जाता, या अब इस बाग में बुलबुल हम रहेंगे या तुम।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी उलझन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि ये शोर, ये तड़प, हर सुबह के साथ थमने वाली चीज़ नहीं है। वो एक सवाल पूछते हैं—क्या यह महफ़िल में केवल हम ही रह जाएंगे, या आप भी साथ रहेंगे? यह इश्क़ की उस बेचैनी को दिखाता है, जो न जाने किस मोड़ पर हमें अकेला छोड़ सकती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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