ने दिल रहा बजा है न सब्र ओ हवास ओ होश — मीर तक़ी मीर

ने दिल रहा बजा है न सब्र ओ हवास ओ होश आया जो सैल-ए-इश्क़ सब अस्बाब ले गया

“Neither the heart, nor the lute, nor patience, nor desire, nor consciousness remain, When the mountain of love arrives, it takes away all circumstances.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जब इश्क़ का पहाड़ आता है, तो न दिल बचा है, न वीणा, न सब्र, न हवस, न होश; यह सब कुछ ले जाता है।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने प्रेम की उस अदम्य शक्ति को बयान किया है। शायर कहते हैं कि मेरा दिल तो बजा दिया गया है, और मैंने अपना सब्र, अपनी हवस और होश... सब कुछ खो दिया है। यह सब कोई एक घटना नहीं है, बल्कि प्रेम के विशाल, पहाड़ जैसे सैलाब का आना है। यह इश्क़ की उस मदहोशी और गहराई को दर्शाता है जो इंसान को पूरी तरह से डुबो देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.