आवे जो मस्तबा में तो सुन लो कि राह से — मीर तक़ी मीर
“If you come to the gathering, listen closely, that from the path, the one took a cup of wine-like intoxication.”
अर्थ
जो भी मस्तबा में आ रहा है, वह सुन लो कि रास्ते से शायर ने एक जाम-ए-मय-ए-नाब ले लिया।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के मयख़ाने के अंदाज़ को बयां करता है। शायर यहाँ एक माहौल बनाते हैं, एक महफ़िल का न्योता देते हैं। लाइनें बताती हैं कि एक दोस्त ने राह से बस एक जाम उठा लिया। बात चोरी की नहीं, बल्कि उस बेपरवाह, सहज पल की है। यह जीवन के ऐसे ही छोटे-छोटे, नशीले पलों को दर्शाती है, जहाँ हर साधारण काम भी एक खूबसूरत नज़्म बन जाता है।
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