“The intensity of that fire of your divine love was difficult to lose, The people who made you 'Ram' performed such wonders.”
ऐसे आहु-ए-रम-ख़ुर्दा की वहशत खोनी मुश्किल थी, और जिन लोगों ने तुझ को राम किया, उन्होंने ऐसा सेहर और ए'जाज़ किया।
यह शेर तारीफ और धोखे की बहुत गहरी बात करता है। शायर कहते हैं कि किसी इश्क़ की वह हालत, जो जुनून और पागलपन से भरी हो, उसे छोड़ना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन असली बात दूसरी लाइन में है! जब लोगों ने किसी को 'राम' जैसा मान लिया, तो वो जाग गए और चमत्कार करने लगे। इसका मतलब है कि जब किसी चीज़ की बहुत ज़्यादा तारीफ़ की जाती है, तो उसका असली रूप सामने आ जाता है, और वो जादू टूट जाता है।
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