सुब्ह चमन में उस को कहीं तकलीफ़-ए-हवा ले आई थी रुख़ से गुल को मोल लिया क़ामत से सर्व ग़ुलाम किया

“The morning garden, how did the gentle breeze bring her such sorrow, She bought the rose by its face and enslaved all by her stature.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

सुबह के बगीचे में हवा ने उसे कहीं तक तकलीफ दी, उसने अपने चेहरे से फूल को मोल लिया और अपनी काया से सबको गुलाम बना लिया।

विस्तार

यह शेर महबूब की उस जादुई अदा का ज़िक्र करता है। शायर कह रहे हैं कि सुबह की हवा में ही उस की कोई नशीली ख़राबी थी। सिर्फ़ अपने चेहरे से उसने फूल (यानी दिल) को मोह लिया, और अपनी बस मौजूदगी से उसने हर किसी को गुलाम बना दिया। यह कमाल की खूबसूरती की बात है!

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