बे-सबब आता नहीं अब दम-ब-दम आशिक़ को ग़श — मीर तक़ी मीर
बे-सबब आता नहीं अब दम-ब-दम आशिक़ को ग़श
दर्द खींचा है निहायत रंज उठाया है बहुत
“No longer does the lover arrive breath by breath without reason; / The pain has pulled, and much sorrow has been lifted.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बिना किसी कारण के अब आशिक़ को हर साँस के साथ बेहोशी होती है; दर्द बहुत खींचा है और बहुत दुख उठाया है।
विस्तार
यह शेर उस दिल की हालत बयां करता है जो बहुत ज़्यादा दर्द झेल चुका है। शायर कह रहे हैं कि अब आशिक़ को हर पल एक अजीब-सा बे-सबब नशा या ग़श आता है। यह ग़श किसी एक घटना से नहीं, बल्कि इतने सारे दर्द और रंज के जमावड़े से आया है.... एक ऐसी थकान जो रूह में बस जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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