घर आए हो फ़क़ीरों के तो आओ बैठो लुत्फ़ करो क्या है जान बिन अपने कने सो इन क़दमों पे निसार है आज

“If you have come to the faqirs' abode, please come and rest here, For today my life is dedicated, offered at your feet.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर आप फ़कीरों के घर आए हैं, तो आइए और यहाँ आराम कीजिए। आज मेरी जान आपके चरणों में समर्पित है।

विस्तार

यह शेर बहुत ही गहरा है, यह बेपनाह मोहब्बत और इल्तिजा की बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर आप फ़क़ीरों के घर आए हैं, तो आप आराम से रहिए। लेकिन दूसरी लाइन में वो अपनी जान कुर्बान कर देते हैं! वो कहते हैं कि जान के बिन ज़िन्दगी का कोई वजूद नहीं.... और आज, मेरी पूरी कायनात, ये क़दमों पर न्योछावर है। यह इश्क़ की सबसे बड़ी निशानी है।

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