क्या पूछो हो साँझ तलक पहलू में क्या क्या तड़पा है
कल की निस्बत दिल को हमारे बारे कुछ तो क़रार है आज
“Why ask what writhed beside me till the dusk? Compared to yesterday, my heart has some peace today.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या पूछूँ कि साँझ होने तक पहलू में क्या-क्या तड़पा है। कल की निस्बत दिल को हमारे बारे में कुछ तो क़रार है आज।
विस्तार
यह शेर उस दर्द भरे एहसास को बयां करता है, जब दिल को पता नहीं होता कि किस तकलीफ के बारे में पूछे। शायर पूछते हैं कि शाम ढलने तक कितने तड़प उठे हैं... लेकिन सबसे ख़ूबसूरत बात दूसरी लाइन में है। तमाम गमों के बावजूद, कल की यादों में भी आज एक अजीब-सा क़रार मिल गया है। यह वक़्त का कमाल है!
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