गोर-ए-मजनूं से न जावेंगे कहीं हम बे-नवा — मीर तक़ी मीर

गोर-ए-मजनूं से न जावेंगे कहीं हम बे-नवा ऐब है हम में जो छोड़ें ढेर अपने पीर का

“We will not go anywhere from the Beloved Majnun, Oh, we have flaws in us, for we leave behind much of our suffering.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हम कहीं से प्यारे मजनू के नहीं जाएँगे, क्योंकि हम में ऐसी खामियाँ हैं कि अपने पीर का बहुत कुछ छोड़ देते हैं।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ इश्क़ की बात नहीं करता, बल्कि रूहानी राह की बात करता है। शायर कहते हैं कि हम मजनूँ की राह नहीं छोड़ेंगे.... लेकिन तुरंत ही वो अपनी गलती बताते हैं! वो कहते हैं कि असली कमी हमें अपने पीर (गुरु) को छोड़ देने में है। मतलब, सच्चे इश्क़ के लिए, मार्गदर्शक का साथ सबसे ज़रूरी होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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