लख़्त-ए-दिल से जूँ छिड़ी फूलों की गूंधी है वले
फ़ाएदा कुछ ऐ जिगर इस आह-ए-बे-तासीर का
“From the wound of the heart, a knot of flowers has sprung, what use is this sigh of futility, O liver?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल के घाव से फूलों का गुच्छा निकल आया है, ऐ जिगर, इस बेकार आह का क्या फ़ायदा?
विस्तार
यह शेर टूटे हुए दिल और खोई हुई खूबसूरती के गहरे दर्द को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जब दिल की खुशबू ही छिन चुकी है, तो इस बे-असर आह का क्या फ़ायदा? यह निराशा और तसल्ली का भाव है—दर्द इतना गहरा है कि रोने या आह भरने का काम भी बेमानी हो जाता है।
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