चमन की वज़' ने हम को क्या दाग़ — मीर तक़ी मीर
चमन की वज़' ने हम को क्या दाग़
कि हर ग़ुंचा दिल-ए-पुर-आरज़ू था
“What flaw did the fragrance of the garden inflict upon us, That every bud was the heart of desire?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
चमन की खुशबू ने हम पर क्या दाग़ लगाया, कि हर कली ही इच्छाओं से भरा दिल थी।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक बहुत ही गहरा तसव्वुर है। यहाँ 'चमन' जीवन की ख़ूबसूरती या महबूब का नशा है। शायर पूछ रहे हैं कि हमें क्या दाग़ लगा? जवाब है कि हर फूल, हर कली (गूँचा) असल में हमारे दिल की आरज़ू का आईना थी। यह एक विरोधाभास है—जो चीज़ ख़ुशी देती है, वही दर्द का कारण भी बन जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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