गो शब उस दर से दूर पहरों फिरें — मीर तक़ी मीर
“We wander far from that gate, through passing nights, Yet we are near, like guards who watch the sights.”
अर्थ
गो शब उस दर से दूर पहरों फिरें, पर पास तो पासबाँ के हम भी हैं। इसका शाब्दिक अर्थ है कि हम उस द्वार से बहुत दूर घूमते हैं, लेकिन फिर भी हम पास के पहरेदारों की तरह नज़दीक हैं।
विस्तार
यह शेर विरह और चाहत के सबसे गहरे विरोधाभास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि हम उस दरवाज़े से दूर होकर भी, रात भर बस उसकी निगरानी करते हैं। यह कैसा इश्क़ है, जहाँ दूर जाना भी पास ही रहने जैसा है! यह बताता है कि कुछ लगाव इतने गहरे होते हैं कि हम उन्हें छोड़ नहीं पाते, चाहे हम कितनी भी कोशिश कर लें।
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