बोसा मत दे किसू के दर पे नसीम — मीर तक़ी मीर
“Do not give any devotion at the threshold, O breeze, We too are the dust of that very doorstep.”
अर्थ
नसीम, किसी के दर पर कोई आलिंगन मत देना, क्योंकि हम भी उसी आँगन की धूल हैं।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरे समर्पण और विनम्रता को बयां करता है। शायर कहते हैं कि हवा (नसीम) किसी के आँगन या दर पर कोई इत्र नहीं लगाएगी, न कोई आलिंगन देगी। वजह क्या है? क्योंकि शायर तो खुद उस आँगन की धूल हैं। यह एक ऐसा भाव है जब इंसान को अपने आप का एहसास होता है कि वह उस जगह का हिस्सा है, उस पवित्रता का हिस्सा है। यह अपनी पहचान और मर्यादा को स्थापित करने का एक बहुत ही शानदार तरीका है।
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