अपना शेवा नहीं कजी यूँ तो — मीर तक़ी मीर
“It's not that I'm a false lover, dear friend, We too are crooked and bent in our ways.”
अर्थ
यार जी, हम भी टेढ़े-बाँके हैं, यह बात है। (यह कहने का मतलब है कि हम भी थोड़े मनचले या अजीब हैं।)
विस्तार
यह शेर आत्म-स्वीकृति और एक तरह के विद्रोह को बयां करता है। जब शायर कहते हैं कि मुझे टेढ़ा मत कहना, तो वह सिर्फ़ खुद का बचाव नहीं कर रहे होते। वह एक गहरी सच्चाई बता रहे होते हैं: कि इंसान का होना ही थोड़ा टेढ़ा होता है। शायर कह रहे हैं कि अगर दुनिया हमें 'टेढ़ा' देखती है, तो शायद यह हमारी गलती नहीं, बल्कि उनकी अपनी सोच की सीमा है। यह अपनी पहचान को स्वीकारने का एक बहुत ही शानदार तरीका है।
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