मेहर ओ वफ़ा ओ लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं और तो सब कुछ तंज़ ओ किनाया रम्ज़ ओ इशारा जाने है

“Oh, the favor, the faithfulness, the grace and the bounty, one is unaware of these; But everything else, be it sarcasm, veiled meaning, symbol, or hint, is known.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेहर, वफ़ा, लुत्फ़ और इनायत जैसे भावों से कोई वाक़िफ़ नहीं है; लेकिन तंज़, किनाया, रम्ज़ और इशारा सब कुछ जाना-पहचाना है।

विस्तार

यह शेर रिश्तों की गहराई और जटिलता को दर्शाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि मेहर (दया), वफ़ा (निष्ठा) और लुत्फ़ (कृपा) जैसी सच्ची भावनाएं किसी एक व्यक्ति को समझ नहीं आतीं। बल्कि, जो चीज़ें हम आसानी से समझ लेते हैं—जैसे तंज़ (व्यंग्य), किनाया (संकेत), या इशारा—वे ही ज़्यादा मायने रखती हैं। यह समझने की एक गहरी बात है कि इंसानी रिश्ते कितने पेचीदा होते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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