तआ'रुफ़ क्या रहा अहल-ए-चमन से — मीर तक़ी मीर
तआ'रुफ़ क्या रहा अहल-ए-चमन से
हुए इक उम्र के पीछे रिहा हम
“What was the acquaintance from the people of the garden? We were freed after a lifetime's pursuit.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तआ'रुफ़ क्या रहा अहल-ए-चमन से? हम तो एक उम्र के पीछे रिहा हुए हैं।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की ज़िंदगी के अनुभव को बयां करता है। शायर यहाँ दुनिया की झूठी बातों और तआ'रुफ़ (जान-पहचान) की बेमानी पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि असली आज़ादी, असली रिहाई.... ये किसी महफ़िल या जान-पहचान से नहीं मिलती। यह तो सिर्फ़ एक पूरी उम्र के संघर्ष और दर्द के बाद मिलती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
