कब आगे कोई मरता था किसी पर — मीर तक़ी मीर
कब आगे कोई मरता था किसी पर
जहाँ में कर गए रस्म-ए-वफ़ा हम
“Before, did anyone ever die for another, Where we performed the ritual of loyalty.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
पहले, क्या कोई किसी के लिए मरता था, जहाँ हमने वफ़ादारी का रिवाज़ कर दिया।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर एक गहरे सवाल के साथ शुरू करते हैं— कि क्या सच में कोई किसी के लिए मरता है? शायर कहते हैं कि शायद ये इश्क़ के वो बड़े-बड़े तमाशे, वो बलिदान... बस रस्में हैं। हमने इस दुनिया में वफ़ादारी की एक 'रस्म' बना ली है। यह एक बहुत ही गहरा तंज़ है कि कैसे इश्क़ के नाम पर वफ़ादारी एक मजबूरी, एक सामाजिक नियम बन गई है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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