तू जहाँ से दिल उठा याँ नहीं रस्म-ए-दर्दमंदी किसी ने भी यूँ न पूछा हुए ख़ाक याँ हज़ाराँ

“From where you lifted your heart, neither are there customs of pain, No one has ever asked, oh dust, or oh thousands.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे शायर, तूने दिल कहाँ से उठाया, क्या दर्द की कोई रस्म है? किसी ने कभी धूल या हज़ारों से यूँ नहीं पूछा।

विस्तार

यह शेर इंसान के अकेलेपन और दर्द की गहराई को दिखाता है। शायर कहते हैं कि जब दिल टूटने का दर्द होता है, तो लोग सिर्फ़ बाहर की चोट देखते हैं। वे यह नहीं पूछते कि असलियत में क्या है—कि क्या आप सिर्फ़ धूल के कण हैं, या हज़ारों ज़िन्दगियों का जमावड़ा? यह एक बहुत ही मार्मिक तन्हाई है, जहाँ कोई भी हमारी अंदरूनी हालत तक नहीं पहुँच पाता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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