कहीं ख़ाक-ए-कू को उस की तू सबा न दीजो जुम्बिश कि भरे हैं इस ज़मीं में जिगर जिगर-फ़िगाराँ

“Do not give the breeze a movement that disturbs the dust of her corpse, For this earth is filled with the hearts and forms of the living.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

कहीं ख़ाक-ए-कू को उस की तू सबा न दीजो जुम्बिश, कि भरे हैं इस ज़मीं में जिगर जिगर-फ़िगाराँ। (अर्थात, उस की समाधि के पास ऐसी हवा का झोंका न देना, कि धूल को भी हिला दे, क्योंकि यह ज़मीन जीवित लोगों के दिलों और रूपों से भरी हुई है।)

विस्तार

यह शेर यादों और मोहब्बत की अमरता को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि मेरे मक़बरे की धूल पर हवा न भेजना.... क्योंकि यह ज़मीन सिर्फ मेरी नहीं है। यह ज़मीन तो हज़ारों दिलों की मोहब्बत, हज़ारों यादों से भरी हुई है। यह कितनी गहरी बात है.... कि इश्क़ की छाप मौत के बाद भी मिटती नहीं!

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