बरसों हुए दिल-सोख़्ता बुलबुल को मूए लेक — मीर तक़ी मीर

बरसों हुए दिल-सोख़्ता बुलबुल को मूए लेक इक दूद सा उठता है चमन-ज़ार से अब तक

“The heartbroken nightingale, after years, found its cup Now rises like a gentle stream from the garden's charm.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

बरसों से दिल टूटने का दर्द सहता बुलबुल, अब चमन के जादू से एक मीठी धारा बनकर उठ रहा है।

विस्तार

यह शेर गहरे दर्द और उम्मीद के बीच के रिश्ते को बयां करता है। शायर कहते हैं कि दिल टूटने का गम तो बरसों पुराना है, जैसे बुलबुल किसी गहरे समंदर में डूबा हो। लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद, अभी भी चमन-ज़ार से एक बूँद उठती है। यह दिखाता है कि निराशा कितनी भी गहरी क्यों न हो, उम्मीद की एक किरण हमेशा बनी रहती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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