मुनासिब नहीं हाल-ए-आशिक़ से सब्र — मीर तक़ी मीर
मुनासिब नहीं हाल-ए-आशिक़ से सब्र
रखे है ये दारू ज़रर की तरफ़
“The patience from the beloved's state is not suitable, This wine is directed towards the cup of intoxication.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रेमी की हालत से सब्र नहीं है, यह शराब नशे के प्याले की ओर है।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है, जब इश्क़ की आग में सब कुछ बेमानी लगने लगता है। शायर कहते हैं कि आशिक़ की हालत में सब्र रखना मुमकिन नहीं है। ये शराब यहाँ महज़ एक चीज़ नहीं है; यह उस ज़हर का प्रतीक है, जो दिल को सुकून देने के बजाय, उसे और गहरे ग़म में डुबो देता है। यह वफ़ादारी और वज़ूद के बीच का एक ख़ूबसूरत संघर्ष है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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