टपकता है पलकों से ख़ूँ मुत्तसिल — मीर तक़ी मीर

टपकता है पलकों से ख़ूँ मुत्तसिल नहीं देखते हम जिगर की तरफ़

“Blood drips from the eyelids, continuous and slow, We don't look towards the heart's deep glow.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

पलकों से लगातार खून टपक रहा है, फिर भी हम दिल की ओर नहीं देखते।

विस्तार

यह शेर दिल के गहरे दर्द को बयां करता है। आँखों से टपकता 'खून' सिर्फ आँसू नहीं, बल्कि वो दर्द है जो बाहर दिख रहा है। लेकिन शायर कहते हैं कि हम अपनी 'जिगर' की तरफ़ नहीं देखते। इसका मतलब है कि हम जानबूझकर अपने सबसे बड़े घाव, अपने अंदरूनी दर्द को देखने से इनकार कर देते हैं। यह एक तरह का भावनात्मक बचाव है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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