उस की ज़बाँ के ओहदे से क्यूँकर निकल सकूँ — मीर तक़ी मीर

उस की ज़बाँ के ओहदे से क्यूँकर निकल सकूँ कहता हूँ एक मैं तो सुनाता है मुझ को दस

“How shall I escape from the reach of her tongue? I say one thing, but she makes me hear ten.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उसकी ज़बान के ओहदे से मैं कैसे निकल सकता हूँ? मैं एक बात कहता हूँ, पर वह मुझे दस बातें सुनाती है।

विस्तार

यह शेर आशिक़ के दिल की बात कहता है.... माशूक़ की ज़ुबान का जादू! शायर कहते हैं कि मैं भले ही एक बात कहूँ, लेकिन वो उसे दस बातों में बदल देती है। यह सिर्फ़ बातों का विस्तार नहीं है, बल्कि यह है कि वो अपनी ज़ुबान से वक़्त को रोक लेती है.... और आशिक़ बस उसी की बात में फँसा रहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.