हैराँ हूँ 'मीर' नज़्अ' में अब क्या करूँ भला — मीर तक़ी मीर

हैराँ हूँ 'मीर' नज़्अ' में अब क्या करूँ भला अहवाल-ए-दिल बहुत है मुझे फ़ुर्सत इक नफ़स

“I am bewildered, Mir, what can I do now in this verse, For my heart's condition, I have no moment's leisure.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं 'मीर' नज़्अ' में हैरान हूँ कि अब क्या करूँ, क्योंकि मेरे दिल की हालत को समझने के लिए मेरे पास एक पल का भी फुर्सत नहीं है।

विस्तार

यह शेर उस गहरे दर्द को बयान करता है जब भावनाएँ इतना हावी हो जाती हैं कि जीवन का हर पल बोझ लगने लगता है। शायर कहते हैं कि मैं नज़्म में इतना हैराँ हूँ.... कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ। दिल की हालत इतनी बिगड़ी हुई है कि मुझे एक साँस लेने की भी फुर्सत नहीं है। यह सिर्फ़ शायरी नहीं है, यह एक रूह की बेचैनी है! एक ऐसा दर्द जो सांसों को भी थाम लेता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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