ग़ालिब कि देवे क़ुव्वत-ए-दिल इस ज़ईफ़ को — मीर तक़ी मीर

ग़ालिब कि देवे क़ुव्वत-ए-दिल इस ज़ईफ़ को तिनके को जो दिखावे है पल में पहाड़ कर

“Grant the strength of heart, Ghalib, to this weak soul, To make a mountain visible from a mere straw in an instant.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर गालिब से कहते हैं कि इस कमज़ोर दिल को शक्ति दें, ताकि वह पल भर में तिनके से पहाड़ जैसा कुछ दिखा सके।

विस्तार

यह शेर ताकत और हौसले के बारे में एक गहरा सवाल है। शायर अपने दिल की कमज़ोरी पर अफसोस जताते हुए पूछते हैं कि किसमें इतनी शक्ति होगी कि वो एक पल में एक छोटे से तिनके को पहाड़ में बदल सके। यह पंक्तियाँ उस अथाह हिम्मत की तलाश को बयां करती हैं, जो जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों से लड़ने के लिए ज़रूरी होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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