बिन गुल मुआ ही मैं तो प तू जा के लौटियो — मीर तक़ी मीर
बिन गुल मुआ ही मैं तो प तू जा के लौटियो
सेहन-ए-चमन में ऐ पर-ए-पर्वाज़ मेरे बा'द
“Without the blossom, I am merely a moth; please return to the garden of my heart, O wing of flight.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बिना फूल के मैं तो बस एक पतंगा हूँ; मेरे दिल के बाग में वापस लौट आओ, ऐ उड़ान के पंख।
विस्तार
यह शेर बिछड़ने के दर्द को बयान करता है। शायर कहते हैं कि गुल (फूलों) के बिना भी मेरा जीना आसान था, लेकिन जैसे ही आप गए.... तो यह पूरा चमन, यह महफिल, सूना हो गया। यह एक दर्द है जो सिर्फ़ किसी की याद से आता है। यह एहसास कि आप के बिना, हर चीज़ अधूरी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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