बैठा हूँ 'मीर' मरने को अपने में मुस्तइद — मीर तक़ी मीर

बैठा हूँ 'मीर' मरने को अपने में मुस्तइद पैदा न होंगे मुझ से भी जाँबाज़ मेरे बा'द

“I sit ready to die within myself, O Mir, No master like me shall ever be born after this.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं 'मीर' अपने आप को मरने के लिए तैयार बैठा हूँ; मेरे बाद कोई भी जाँबाज़ पैदा नहीं होगा।

विस्तार

यह शेर न केवल मौत की तैयारी की बात करता है, बल्कि एक कलाकार के अकेलेपन और कला के भविष्य के डर को भी दिखाता है। शायर कहते हैं कि मैं मरने को तैयार हूँ, लेकिन मुझे डर है कि मेरे जाने के बाद... कोई ऐसा जाँबाज़ नहीं मिलेगा जो मेरी कला या मेरे अहसास को जी सके। यह एक गहरी पीड़ा है जो सिर्फ मौत से नहीं, बल्कि अपनी विरासत के ढल जाने के एहसास से जुड़ी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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