साक़ी टुक एक मौसम-ए-गुल की तरफ़ भी देख — मीर तक़ी मीर
“O cupbearer, even if one looks towards the season of flowers, Today, the color is dripping into the garden from the wind.”
अर्थ
शायर कह रहा है कि भले ही दृष्टि फूलों के मौसम की ओर हो, फिर भी आज हवा से रंग बगीचे में टपक रहा है।
विस्तार
यह शेर प्रकृति की सुंदरता और उसकी क्षणभंगुरता को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। शायर यहाँ साक़ी से कह रहे हैं कि सिर्फ़ जाम पर नहीं, बल्कि फूलों के मौसम की तरफ़ भी देखना। आज हवा ने पूरे चमन के रंग ऐसे टपका दिए हैं, जैसे किसी ने रंग बिखेर दिया हो। यह नज़ारा हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी की खूबसूरती भी कितनी नाज़ुक और गुज़र जाने वाली होती है।
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