वाशुद हुई न दिल को फ़क़ीरों के भी मिले — मीर तक़ी मीर
वाशुद हुई न दिल को फ़क़ीरों के भी मिले
खुलती नहीं गिरह ये कसू की दुआ से आज
“Neither the heart of the faqirs was swayed by Vasud, nor did this knot loosen today by the prayer of Kasu.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
वाशुद ने न दिल को फ़क़ीरों का भी झुकाया, और आज यह गाँठ कसू की दुआ से नहीं खुलती।
विस्तार
यह शेर उस दिल की उलझन को बयान करता है, जो किसी भी सहारे से नहीं खुलती। शायर कहते हैं कि यह दर्द इतना गहरा है कि फ़क़ीरों के लिए भी यह सुलझना मुश्किल है। जब दुनिया की हर दुआ और हर तपस्या नाकाम हो जाए, तब यह अहसास होता है कि कुछ दर्द बस दिल का अपना हिस्सा बन जाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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