आए हैं 'मीर' मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज — मीर तक़ी मीर
आए हैं 'मीर' मुँह को बनाए ख़फ़ा से आज
शायद बिगड़ गई है कुछ उस बेवफ़ा से आज
“Meer has arrived, with a face full of displeasure today; perhaps something has soured with that unfaithful one today.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मीर आज ऐसे आए हैं कि उनका मुँह नाराज़ और ख़फ़ा लग रहा है; शायद आज किसी बेवफ़ा से उनका मनमुटाव हो गया है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब आज उदास और ख़फ़ा होकर आया है। और शायर का अंदाज़ा है कि शायद इस बेवफ़ाई का दोष... किसी और को नहीं, बल्कि खुद उस बेवफ़ा शख़्स को है। यह सिर्फ़ एक मुलाकात नहीं है, यह दिल टूटने के बाद की तन्हाई का एहसास है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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