क्या सोज़-ए-जिगर कहूँ मैं हमदम
आया जो सुख़न ज़बान पर रात
“What sorrow of the heart should I speak, my beloved, When the tongue has brought forth such sweet verse at night.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे हमदम, मैं अपने हृदय का क्या दुख कहूँ, जब रात में ज़बान पर इतना मीठा काव्य आया है।
विस्तार
यह शेर उस पल की बात करता है जब दिल का दर्द इतना गहरा हो जाता है कि उसे बयां करना मजबूरी बन जाती है। शायर कह रहे हैं कि ये जिगर की जलन... ये सोज़... मैं हमदम को कैसे बताऊँ! ये दर्द तो रात के आने का इंतज़ार करता है, जब ज़बान पर ये बातें अपने आप आ जाती हैं। यह एक बहुत ही ईमानदार, दिल की बात है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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