इत्र-आगीं है बाद-ए-सुब्ह मगर — मीर तक़ी मीर
इत्र-आगीं है बाद-ए-सुब्ह मगर
खुल गया पेच-ए-ज़ुल्फ़ ख़ुश्बू का
“The morning breeze is fragrant with perfume and fire, But the knot of your tresses has released a fragrance.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
सुबह की हवा इत्र और आग जैसी सुगंधित है, लेकिन तुम्हारे बालों के गुंथे हुए पेंच ने सुगंध छोड़ दी है।
विस्तार
यह शेर महक और इत्तेफ़ाक़ का अद्भुत मेल है। शायर कह रहे हैं कि सुबह की हवा में भले ही इत्र की ख़ुशबू फैली हो, लेकिन वह असली, मनमोहक ख़ुशबू.... कहीं और से आ रही है। यह ख़ुशबू माशूक़ के ज़ुल्फ़ों के खुल जाने से आ रही है, मानो उनकी सुंदरता ने एक नया जादू बिखेर दिया हो।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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