है मिरे यार की मिसों का रश्क — मीर तक़ी मीर
“The jealousy of my beloved's beauty's grace, Is the burden of the fresh-green lips' trace.”
अर्थ
मेरे यार की मिसों का रश्क, कुश्ता हूँ सब्ज़ा-ए-लब-ए-जू का। (अर्थ: मेरे प्रिय के सौंदर्य की ईर्ष्या, जू के होंठों की हरियाली का बोझ है।)
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ तारीफ़ नहीं है, यह एक गहरे समर्पण का इज़हार है। शायर कहते हैं कि मेरे यार के होठ इतने नज़ाकत भरे हैं कि उन पर रश्क (ईर्ष्या) होती है। लेकिन ये रश्क किस चीज़ की है? शायर ख़ुद को उन होठों की ताज़गी, 'सब्ज़ा' बताते हैं। इसका मतलब है कि शायर का वजूद, उसका होना, उस सुंदरता का ही हिस्सा है। एक बेहद गहरा, आत्मिक रिश्ता!
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