शोला-ए-आह जूँ-तूँ अब मुझ को — मीर तक़ी मीर

शोला-ए-आह जूँ-तूँ अब मुझ को फ़िक्र है अपने हर बिन मू का

“Oh, the grief of my sigh, my dear, now you are gone to me; / I worry about my every single breath without you.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शोला-ए-आह, प्रिय, अब मुझको क्या फ़िक्र है? मैं तो अपने हर बिन मू का हूँ।

विस्तार

यह शेर एक गहरे, बेचैन प्रेम को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि मेरी साँसों की ये आग, ये शोला, अब सिर्फ़ तुम्हारे लिए है। लेकिन उनकी चिंता महबूब की रजामंदी नहीं है.... बल्कि वह तो अपने हर पल की फिक्र में हैं.... अपने उस वजूद की फिक्र जो तुम्हारे बिना है। यह वियोग की गहरी बेचैनी का इज़हार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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