निगाह-ए-मस्त ने उस की लुटाई ख़ानका सारी — मीर तक़ी मीर
निगाह-ए-मस्त ने उस की लुटाई ख़ानका सारी
पड़ा है बरहम अब तक कारख़ाना ज़ोहद-ओ-ताअत का
“The gaze of the intoxicated one has plundered his entire khanqah, Now, the workshop of asceticism and devotion lies ruined.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मस्ती भरी निगाह ने उसकी पूरी खानकाह लूट ली, और अब ज़ौद और आज़माइश का कारख़ाना वीरान पड़ा है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस कशिश और ताकत को बयां करता है, जो किसी भी चीज़ को तहस-नहस कर सकती है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि महबूब की एक नशीली निगाह.... एक पूरे खानकाह को लूट सकती है। इतना बड़ा झटका लगने के बाद भी, ज़ौद-ओ-ताअत का कारख़ाना अब तक वीरान पड़ा है। यह इश्क़ की विडंबना है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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