क़दम टक देख कर रख 'मीर' सर दिल से निकालेगा — मीर तक़ी मीर

क़दम टक देख कर रख 'मीर' सर दिल से निकालेगा पलक से शोख़-तर काँटा है सहरा-ए-मोहब्बत का

“Looking at your steps, 'Mir', the heart will draw back its veil, The thorn of the desert of love is more dazzling than an eyelid.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

आपके कदम देखकर 'मीर' दिल से अपना आवरण हटा देगा। मोहब्बत के रेगिस्तान का काँटा पलक से अधिक शोख़ है।

विस्तार

यह शेर प्रेम के सफर की बहुत गहरी बात करता है। शायर कहते हैं कि इश्क़ का रास्ता इतना ख़तरनाक है कि यहाँ हर पल एक इम्तिहान है। यह दर्द सिर्फ़ आँखों का धोखा नहीं है, बल्कि यह एक काँटे की तरह चुभता है, जो पलक की नज़ाकत से भी ज़्यादा ज़ोरदार है। यह एहसास दिलाता है कि मोहब्बत का दर्द कितना गहरा और बे-रहम होता है। वाह! क्या बात कही है शायर ने!

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