हरीफ़-ए-बे-जिगर है सब्र वर्ना कल की सोहबत में — मीर तक़ी मीर
“Everyone is a heartless fool, unless patience is there, for in the company of tomorrow, there was a quarrel of grace and charm, and a single courage.”
अर्थ
हर कोई दिल का बे-जिगर है, जब तक कि सब्र न हो; क्योंकि कल की महफ़िल में भी नज़ाक और नज़ा का झगड़ा था, और एक हिम्मत की ज़रूरत थी।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरे एहसास को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि उनका सब्र, उनका संयम, दरअसल कितना नाज़ुक है। वो कहते हैं कि अगर ये सब्र टूट गया.... तो प्यार के ये छोटे-मोटे झगड़े, ये नाज़ और नियाज़ का तकरार, एक बड़ी, ज़बरदस्त जुरअत बन जाएगा! यह भावनाओं के उफान का एक बेहतरीन चित्रण है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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