ज़मीं इक सफ़्हा-ए-तस्वीर बे-होशाँ से माना है — मीर तक़ी मीर

ज़मीं इक सफ़्हा-ए-तस्वीर बे-होशाँ से माना है ये मज्लिस जब से है अच्छा नहीं कुछ रंग सोहबत का

“This earth is a page of unconscious beauty, Since this gathering began, the company's colors are not good.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

धरती को एक बेसुध तस्वीर का पन्ना माना गया है। जब से यह महफ़िल शुरू हुई है, संगत के रंग अच्छे नहीं हैं।

विस्तार

यह बहुत ही गहरा शेर है जो महफिलों में महसूस होने वाली बेबसी और निराशा को बयां करता है। मिर्ज़ा कहते हैं कि यह दुनिया ही एक बे-होश तस्वीर के पन्ने जैसी है.... और जब से यह महफ़िल शुरू हुई है, साथ की रौनक, रंग.... सब कुछ फीका पड़ गया है। यह दोस्तों के साथ बिछड़ते जा रहे जादू और रिश्तों की नश्वरता पर एक दर्दभरा तराना है।

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