ग़लत है इश्क़ में ऐ बुल-हवस अंदेशा राहत का — मीर तक़ी मीर

ग़लत है इश्क़ में ऐ बुल-हवस अंदेशा राहत का रिवाज इस मुल्क में है दर्द-ओ-दाग़-ओ-रंज-ओ-कुलफ़त का

“Wrong is love, O restless heart, the notion of solace; This land's custom is of pain, of blemishes, sorrow, and affliction.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ऐ बेचैन मन, इश्क़ में राहत की उम्मीद करना गलत है; इस देश का रिवाज़ दर्द, दाग़, ग़म और तकलीफ का है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की कड़वी सच्चाई बताता है। शायर कहते हैं कि प्यार में किसी भी तरह की राहत या सुकून की उम्मीद करना ग़लत है। क्योंकि जिस दुनिया में हम जी रहे हैं, वह सुकून की नहीं, बल्कि दर्द, दाग़, ग़म और तकलीफों से भरी हुई है। यह एक गहरी उदासी है, जो हमें ज़िंदगी की कड़वी हक़ीक़त से रूबरू कराती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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