दिल-ए-बे-रहम गया शैख़ लिए ज़ेर-ए-ज़मीं — मीर तक़ी मीर

दिल-ए-बे-रहम गया शैख़ लिए ज़ेर-ए-ज़मीं मर गया पर ये कुहन गब्र-मुसलमाँ न हुआ

“The heart that is without mercy took the Sheikh into the earth, Though he died, this old tomb, O Muslim, did not become (a place of rest).”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

निर्दयी दिल ने शेख को ज़मीन में लेटा दिया। मर गया, पर यह पुरानी कब्र, ऐ मुसलमाँ, आरामगाह नहीं बनी।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक गहरा तंज़ और दर्शन है। शायर यहाँ इंसान के पाखंड और मौत के सच का ज़िक्र कर रहे हैं। वह कहते हैं कि अगर किसी का दिल ही बेरहम हो, तो मरने के बाद भी उसकी कब्र (ग़बर) मुसलमाँ नहीं रह पाती। यह एक कड़वा आईना है जो हमें बताता है कि सिर्फ़ रस्में निभाना काफ़ी नहीं है, आत्मा का पाक होना ज़रूरी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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