शुक्र-सद-शुक्र कि मैं ज़िल्लत-ओ-ख़्वारी के सबब — मीर तक़ी मीर
“For the sake of disgrace and debasement, I did not achieve any title, oh beloved, like Venus's shine.”
अर्थ
शुक्र की चमक के कारण, मैं अपमान और नीचता के कारण, किसी उपाधि में हम-चश्म-ए-अज़ीज़ाँ नहीं हो पाया।
विस्तार
यह शेर न सिर्फ़ मिर्ज़ा के दर्द को बयां करता है, बल्कि एक अजीब सा सुकून भी देता है। शायर कहते हैं कि उन्हें अपनी 'ज़िल्लत' (घमंड न होना) के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए। क्यों? क्योंकि अगर वह किसी ऊंचे मुक़ाम पर पहुँच जाते, तो उनकी तुलना महबूब की नज़र से होती.... और वह तुलना, शायर के लिए बहुत भारी पड़ जाती। इसलिए, यह ज़िल्लत ही उनकी सबसे बड़ी हिफ़ाज़त है।
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