गो तवज्जोह से ज़माने की जहाँ में मुझ को — मीर तक़ी मीर

गो तवज्जोह से ज़माने की जहाँ में मुझ को जाह-ओ-सर्वत का मयस्सर सर-ओ-सामाँ न हुआ

“O, grant me the grace to live in the world, but I have not attained the wealth or the possession of worldly glory.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे तवज्जोह, मुझे इस दुनिया में जीने की कृपा दे, पर मुझे दुनिया की शोहरत और धन-दौलत का कोई साधन नहीं मिला।

विस्तार

यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है जब इंसान को लगता है कि उसकी मेहनत और वजूद को दुनिया कभी समझ नहीं पाई। शायर कह रहे हैं कि उन्हें वो तवज्जोह नहीं मिली.... कि वो ज़माने में जाह और दौलत हासिल कर पाते। यह एक कड़वी सच्चाई है.... कि वक़्त और दुनिया का साथ मिलना कितना मुश्किल होता है।

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