घर के घर जलते थे पड़े तेरे — मीर तक़ी मीर

घर के घर जलते थे पड़े तेरे दाग़-ए-दिल देखे बस चमन देखा

“The homes were burning with your memory, / I only saw the garden, forgetting the stain on my heart.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तेरे दाग़-ए-दिल की यादों से घर-घर जलते थे, लेकिन मैंने बस चमन देखा और दिल पर लगे दाग़ को भुला दिया।

विस्तार

यह शेर बताता है कि इश्क़ का दर्द कितना गहरा और हर जगह फैल चुका होता है। शायर कहते हैं कि महबूब की यादों का दिया हर घर में जल रहा है, और जब वह चमन की सुंदरता देखता भी है, तो उसे बस दिल के दाग़ दिखाई देते हैं। यह वो दर्द है जो किसी एक जगह सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी ज़िन्दगी को रंग देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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