थी मस्लहत कि रुक कर हिज्राँ में जान दीजे — मीर तक़ी मीर

थी मस्लहत कि रुक कर हिज्राँ में जान दीजे दिल खोल कर न ग़म में मैं एक बार रोया

“It was best that I gave my life in separation, I never wept once, opening my heart in sorrow.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

यह बेहतर था कि मैं बिछोह में रुककर जान दे दूँ, और मैं कभी भी दुःख में मन खोलकर रोया नहीं।

विस्तार

यह शेर जुदाई के गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि दिल के सारे ग़म को एक बार ज़ोर से रोकर बाहर निकालना... इससे बेहतर है कि हम चुपचाप हिज्र में जीना सह लें। यह एक एहसास है कि कभी-कभी, भावनाओं पर काबू रखना ही सबसे बड़ी हिम्मत होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.