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हर गुल ज़मीन याँ की रोने ही की जगह थी मानिंद-ए-अब्र हर जा मैं ज़ार ज़ार रोया

Every flower in this earth was a place to weep, Like the cloud, I wept sorrowfully.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर फूल इस ज़मीन पर रोने की जगह था, और मैं बादल की तरह ज़ोर-ज़ोर से रोया।

विस्तार

यह शेर ग़म की उस गहराई को बयान करता है, जो हर जगह मौजूद है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि दुनिया में हर फूल, हर जगह रोने की जगह है। मानो हर जगह पर दुःख का साया हो, और शायर ने पूरे वजूद में, हर पल, लगातार रोना झेला है। यह एक सार्वभौमिक उदासी है।

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