गलियाँ भरी पड़ी हैं ऐ बाद ज़ख़्मियों से — मीर तक़ी मीर

गलियाँ भरी पड़ी हैं ऐ बाद ज़ख़्मियों से मत खोल पेच ज़ालिम उस ज़ुल्फ़-ए-मुश्क-बू का

“The lanes are filled with the wounds of the injured, O beloved; do not reveal the tangled coils of that musk-scented tresses.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

गलियाँ ज़ख्मी लोगों के घावों से भरी पड़ी हैं, ऐ प्रिय; उस कस्तूरी-सुगंधित केशराशि के उलझे हुए गुच्छे को ज़ालिम मत खोलना।

विस्तार

यह शेर दिल की नज़ाकत और दर्द की गहराई को बयां करता है। शायर कहते हैं कि दिल पहले से ही ज़ख़्मों से भरा पड़ा है, और उस पर कोई भी नया आघात नहीं होना चाहिए। वह मुश्क-बूदार ज़ुल्फ़ को खोलना मना करते हैं, क्योंकि वह महक और खूबसूरती इतनी खतरनाक है कि घावों को फिर से कुरेद सकती है। यह संयम की एक बहुत गहरी गुहार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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