न हो क्यूँ ग़ैरत-ए-गुल-ज़ार वो कूचा ख़ुदा जाने — मीर तक़ी मीर

न हो क्यूँ ग़ैरत-ए-गुल-ज़ार वो कूचा ख़ुदा जाने लहू इस ख़ाक पर किन किन अज़ीज़ों का गिरा होगा

“Oh, the path of the flower garden, which God knows, why is it not a source of honor? On this dust, the blood of how many dear ones must have fallen.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे फूल वाले बगीचे के रास्ते, जिसे ख़ुदा जानता है, यह क्यों इज़्ज़त का स्रोत नहीं है? इस मिट्टी पर कितने प्यारे लोगों का खून गिरा होगा।

विस्तार

यह शेर सिर्फ एक गली की बात नहीं करता, बल्कि इतिहास के उस अनकहे दर्द को बयान करता है। शायर पूछ रहे हैं कि यह गली इतनी साधारण क्यों है, कि इसमें कोई 'ग़ैरत' (गरिमा) नहीं बची। लेकिन फिर वह कहते हैं कि इस धूल पर कितने अज़ीज़ों का लहू गिरा होगा! यह एहसास दिलाता है कि हर साधारण जगह के पीछे कोई बड़ी कहानी छिपी होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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